जवासा गांव में बारिश के कारण लोगों के गिरे घर,ग्रामीणों ने पलायन का रुख अपनाया
गांव में बाढ़ जैसे हालात,किसी ने नही ली सुध,पटवारी,सरपंच व सचिव बेखबर
डेढ़ साल पहले पति का छूटा साथ,अब कुदरत ने छत छीन कर किया बेघर

अमित सिंह कुशवाह/भिण्ड
भिण्ड 20 सितम्बर। कहा जाता है कि वक्त जब कहर बरपाता है तो एक के बाद एक परीक्षा लेता है।यही स्थिति अटेर विधानसभा अंतर्गत ग्राम पंचायत जवासा निवासी सरोज का है।जिनको कुदरत की एक के बाद एक मार झेलनी पड़ रही हैं।आलम यह है कि डेढ़ साल पहले उनके पति का देहांत हो गया था।जिसके बाद जैसे तैसे मुफ़लिसी में गुजर बसर करके महनत मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रही थी लेकिन लगातार बारिश के कारण उनका घर गिर गया हालांकि कोई हताहत नहीं हुई हैं।लेकिन गरीबी में घर गिरने से बेघर हो गई हैं।
डेढ़ साल गुजर जाने के बाद भी नहीं बन सकी विधवा पेंशन
बता दें कि सरोज के पति को गुजरे डेढ़ साल हो गया बाबजूद इसके सरोज की अभी तक विधवा पेंशन तक नही बन सकी है।पेंशन के लिए सरोज ने सभी के दरबाजो को खटकाया लेकिन किसी ने भी सरोज की मदद करना मुनासिब नहीं समझा।ओर तो ओर सरोज के द्वारा सरपंच सचिव पटवारी से भी पेंशन की बात कही लेकिन किसी ने भी उसकी बात को गंभीरता से नही लिया इतना ही नहीं घर को गिरे भी दो दिन गुजर गए है लेकिन अभी तक न ही कोई मुआयना करने आया और न ही शासन स्तर पर कोई भी आश्वासन दिया गया है।जिससे पूरे परिवार में निराशा की स्थिति बन गई है।
गांव में बारिश के कारण कई लोगों के गिरे घर, पटवारी तहसीलदार ने मूंद रखी है आंखे
बता दें कि जवासा गांव में घर गिर जाने एवं फसल खराब हो जाने के कारण कई लोग गांव से पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।इतना ही नहीं जवासा निवासी जयपाल सिंह ने बताया कि न सिर्फ बाढ़ के कारण उनका घर गिर गया बल्कि घर रखा करीब पचास हजार से अधिक रुपये का सामान भी खराब हो गया।जिससे उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है।इसके अलावा भी गांव के अन्य लोगों का खासा नुकसान हुआ है। लेकिन अभी तक पटवारी तहसीलदार तो दूर की बात है सरपंच सचिव ने भी गांव में हुए नुकसान का जायजा नही लिया है न पटवारी तहसीलदार हरकत में आए हैं।बाढ़ के कारण गांव में मुख्य रूप से रामनिवास,चंद्राणी देवी,रामकिशोर सिंह आदि का का घर गिर जाने एवं सामान खराब हो जाने से काफी नुकसान हुआ है।जहाँ तक की भिण्ड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव भी बाढ़ ग्रसित क्षेत्रो का जायजा कर रहे हैं ओर तो लोगो आर्थिक सहायता दिलाने की भी बात कह रहे हैं लेकिन जवासा हलका के पटवारी बेखबर होकर चेन की नींद सो रहे हैं।अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पटवारी तहसीलदार के द्वारा लोगो को क्या सहायता मिल सकती हैं।यहाँ तक की अनुविभागीय अधिकारी की सक्रियता भी कुछ खाश नजर नहीं आई।

