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मीजल्स-रूबेला का टीका लगवाएं एवं स्‍कूलों, आंगनवाडी और स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों पर बच्‍चों को आयरन की गोली खिलाऐं – कलेक्‍टर

मीजल्स-रूबेला का टीका लगवाएं एवं स्‍कूलों, आंगनवाडी और स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों पर बच्‍चों को आयरन की गोली खिलाऐं – कलेक्‍टर

जिला समन्‍वय समिति की बैठक संपन्‍न:-

 ग्वालियर। मीजल्स-रूबेला का टीकाकरण अभियान एवं अनीमिया मुक्‍त भारत अभियान अंतर्गत जिला समन्‍वय समिति की बैठक कलेक्‍टोरेट सभाकक्ष में कलेक्‍टर श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अध्‍यक्षता में शुक्रवार को संपन्‍न हुई। इस अवसर पर एडिशनल एसपी (आईपीएस) श्री मोती उर रहमान, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मनीष शर्मा , एडिशनल सीईओ जिला पंचायत श्री विजय दुबे, एसएमओ, (डब्ल्यूएचओ) डॉ एम.एस. राजावत, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ.मनोज गुप्ता, शिक्षा विभाग के अधिकारी श्री अजय कटियार, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ.आर.के. गुप्ता, विभिन्‍न ब्‍लॉक के बीएमओ एवं विभागीय अधिकारी/ कर्मचारी आदि उपस्थित र‍हे।

कलेक्‍टर ने निर्देशित किया कि मीजल्स रूबेला अभियान के द्वितीय चरण 19 दिसम्बर से 24 दिसम्बर 2022 तक आयोजित किया जाना है जिसमें मीजल्स- रूबेला टीकाकरण से छूटे हुये बच्चों का टीकाकरण शत प्रतिशत कराये साथ ही अनीमिया मुक्‍त भारत अभियान के अंतर्गत विभाग मिलकर समन्वित कार्य करें एवं एसडीएम की अध्‍यक्षता में ब्‍लॉक स्‍तरीय समन्‍वय समिति की बैठक आयोजित कर रिर्पोटिंग एवं अनीमिक बच्‍चों को अनीमिया से मुक्‍त करने की रणनीति बनाऐं एवं प्रगति की रिपोर्ट टी. एल. बैठक में प्रस्‍तुत की जाए। बच्‍चों को अनीमिया मुक्‍त करने के लिए संवेदनशीलतापूर्वक कार्य किया जाए। डिजिटल हीमोग्‍लोबीनोमीटर से बच्‍चों की अनीमिया की स्‍क्रीनिंग की जाए । नामजद सूची तैयार कर अनीमिया से मुक्‍त हुए बच्‍चों की सूची प्रस्‍तुत की जाए।

 एसएमओ, (डब्ल्यूएचओ) डॉ एम.एस. राजावत ने मीजल्स- रूबेला टीकाकरण अभियान के प्रथम एवं आने वाले द्वितीय चरण पर प्रजेंटेशन दिया।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला ग्वालियर डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि यह निरंतर चलने वाला अभियान है कार्यक्रम के अंतर्गत स्‍कूली एवं आंगवाडी केन्‍द्र के बच्‍चों को 6 माह से 59 माह तक के बच्‍चों को आयरन सीरप (आंगनवाडी केंद्रों में) , (5 से 9 साल के बच्‍चों को आयरन की गुलाबी गोली (सप्ताह में एक बार शासकीय स्कूलों में) 10 से 19 साल तक के बच्‍चों को आयरन की नीली गोली (सप्ताह में एक बार शासकीय स्कूलों में) एवं गर्भवती तथा धात्री माताओं को आयरन की लाल गोली प्रतिदिन खिलाई जाती है।

न्‍युट्रीशनल इंटरनेशनल के क्षेत्रीय समन्‍वयक श्री मिर्ज़ा रफीक बेग ने बताया कि अनीमिया (खून में हीमोग्‍लोबीन की कमी) के कारण शरीर के अंगों को ऑक्‍सीजन नहीं मिल पाता जिसके कारण स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याऐं होती है। अनीमिया के लक्षणों में जल्‍दी थक जाना, सांस फुलना, जल्‍दी जल्‍दी बीमार पडना, भूख ना लगना, सुस्‍ती व नींद आते रहना, पढाई खेल व अन्‍य कामों में मन नहीं लगना, ऑखों में लालिमा की कमी (निचले पेलेब्रल कंजक्‍टिवा का पीलापन) जीभ की सूजन, पीली त्‍वचा, पैरों में सूजन, नाखूनों का सफेद एवं चपटा होना (काईलोविया) आदि मुख्‍य हैं।

अनीमिया के मुख्‍य कारण अनुवांशिक, कम आयरन वाले भोजन का सेवन, रक्‍त स्राव के कारण खून की कमी, कृमि संक्रमण, लंबे समय तक बीमार होने पर या गंभीर बीमार होने के कारण आदि हैं । अनीमिया से बचाव के लिए आयरन की गोलियों का सेवन, हरी पत्‍तेदार सब्जियों का सेवन, आहार में आयरन प्रोटीन, विटामिन सी युक्‍त, फालेट बी 12 युक्‍त आ‍हार जैसे पालक, बथुआ की भाजी, चुकंदर , गुड, तरबूज, आंवला, संतरा, टमाटर, अनार एवं मांसाहार (यदि मांसाहारी हों तो) आदि का सेवन करना चाहिए। आयरन फोलिक एसिड अनुपूरण से शारिरिक और मानसिक विकास, एकाग्रता में वृद्वि, स्‍वस्‍थ एवं चमकदार त्‍वचा तथा बाल आदि लाभ होते हैं।

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