महाराज श्री ने बताया की गरुण पुराण में लिखा है कि आप देवताओं से पहले अपने पितरो को मना लो क्यूंकि देवता तो आपको आपके कर्म अनुसार फल देते है लेकिन अगर पितृ एक बार खुश हो जाए तो वह वो दे देते है जो तुम्हारे भाग्य में भी नहीं होता और अगर पितृ अप्रसन्न हो जाए तो वो भी छीन लेते है। पूज्य श्री महाराज ने कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा की भागवत वही अमर कथा है जो भगवान् शिव ने पार्वती को सुनाई।कथा सुनना भी सबके भाग्य में नहीं होता जीवन में श्याम नहीं तो आराम नहीं।भगवान को अपना परिवार मानकर उनकी लीलाओं में रमना चाहिए गोविंद के गीत गाए बिना शांति नहीं मिलेगी धर्म,संत,मां-बाप और गुरु की सेवा करो जितना भजन करोगे उतनी ही शांति मिलेगी संतों का सानिध्य हृदय में भगवान को बसा देता है क्योंकि कथाएं सुनने से चित्त पिघल जाता है और पिघला चित ही भगवान को बसा सकता है।श्री जी ने कहा कि आज का मानव तो केवल माया का बंधन ही चारो ओर बांधता फिरता है और बार बार इस माया के चक्कर में इस धरती पर अलग अलग योनियों में जन्म लेता है। तो जब आपके पास भागवत कथा जैसा सरल माध्यम दिया है जो आपको इस जनम मरण के चक्कर से मुक्त कर देगा और नारायण के धाम में सदा के लिए आपको स्थान मिलेगा श्री हाथीवान सरकार सरकार धाम कथा पंडाल में पारीक्षत श्रीमति राममूर्ति डॉ अखलेश उपाध्याय एवम यजमानों सहित धर्मप्रेमियों एवं कई गणमान्य अतिथियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिती दर्ज कराई।
लहार।श्री हाथीवान सरकार बरहा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर परम श्रद्धेय पंडित बृजबिहारी शास्त्री महाराज जी ने भागवत कथा में गौकर्ण एवं धुंधकारी जी के जन्म का विस्तार से वर्णन किया कथा के द्वितीय दिवस पर हजारों की संख्या में भक्तों ने महाराज जी के श्रीमुख से कथा का श्रवण किया द्वितीय दिवस के कथा की शुरुआत भागवत आरती के साथ की गई पूज्य श्री बृजबिहारी शास्त्री जी महाराज ने कथा की शुरुआत में सर्वप्रथम भक्ति, ज्ञान, वैराग्य के बारे में बताया महाराज श्री ने आगे कहा कि भागवत और कृष्ण में कोई भेद नहीं हैं हमको भागवत और कृष्ण में भेद नहीं करना चहिये।उन्होने कहा कि संतों की सेवा में जो आनंद हो वो किसी ओर चीज में नहीं
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