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ओबीसी महासभा ने की मांग, संसद के शीतकालीन सत्र में जाति जनगणना को लेकर हो बहस

ग्वालियर 25 नवंबर। दिल्ली में आज से चालू हुए शीतकालीन संसद सत्र में जातीय जनगणना के मुद्दे पर बहस किए जाने को लेकर आज ओबीसी महासभा ने दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में जातीय जनगणना के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया। जिसमें मुख्य रूप से पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक जी मौजूद रहे। प्रेस वार्ता के माध्यम से केंद्र सरकार को चेतावनी दी गई कि केंद्र सरकार अगर जातीय जनगणना नहीं कराती है तो ओबीसी महासभा दिल्ली घेरने का काम करेगी।

देश मांगे जातिगत जनगणना:-ओबीसी महासभा

दिल्ली ओबीसी महासभा में माननीय सतपाल मलिक जी पूर्व राज्यपाल, राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य धर्मेन्द्र सिंह कुशवाह, इंजी. महेन्द्र सिंह लोधी, प्रदेश अध्यक्ष मध्यप्रदेश डॉ. ब्रिजेन्द्र सिंह यादव दिल्ली प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष वीर सिंह बघेल की संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी गयी है। राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य, इंजी महेन्द्र सिंह लोधी ने बताया कि ओबीसी महासभा गैरराजनैतिक संगठन है साथ ही 18 राज्यों में जातिगत जनगणना एवं ओबीसी के मुद्दों पर जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है। देश में आज दलित पिछड़े, आदिवासी, बंचित समाज को बराबर लाने के लिये देश में उनकी सही सामने लाने के लिये जातिगत जनगणना आवष्यक है। देश में यदि जातिगत जनगणना होती है तो निष्चित ही एससी, एसटी, ओबीसी एवं बंचित समाज को उसका सरकारों के माध्यम से लाभ होगा।

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1- विभिन्न जाति समूह की सामाजिक आर्थिक शैक्षणिक स्थितियां और आवश्यकताओं के बारे में सूचनाओं का सरकारी प्रमाणित दस्तावेज होगा।

2- जातिगत जनगणना से उन जाति समूह की पहचान होगी जो आजादी के बाद से लेकर आज तक सचमुच में वंचित हैं।

3- जातिगत जनगणना से यह सटीक जानकारी प्राप्त होगी कि किसका कितना उत्थान हुआ है सरकार की योजनाओं के द्वारा।

4- जातिगत जनगणना से यह प्रमाणिक सटीक जानकारी प्राप्त होगी की कितनी हिस्सेदारी और भागीदारी वंचित पिछडों को मिली हैं।

5- जातिगत जनगणना से प्रमाणिक सटीक जानकारी प्राप्त हो सकेगी की कितने प्रतिशत पिछड़ा वर्ग के लोग नौकरी, व्यापार, ठेकेदारी, रोजगार एवं अन्य में कितनी भागीदारी है।

6- जातिगत जनगणना से प्राप्त हुए आंकड़ों से पता चलेगा कि पिछड़ों के विकास के लिए संख्या के आधार पर कितना बजट सरकार के द्वारा उनको सुनिश्चित किया जाएगा जिससे उनका समुचित विकास हो सके।

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ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य एडवोकेट धर्मेन्द्र सिंह कुशवाह ने बताया कि देश में सन् 1931 में ब्रिटिश सरकार के द्वारा जातिगत जनगणना करायी गयी थी उस समय देश में आकडों को सार्वजनिक किया गया जिसके आधार पर भारत देश में 52 फीसदी ओबीसी की बतायी गई साथ ही जब देश में आधे से ज्यादा आवादी वाला ओबीसी वर्ग आज भी अपने संख्या के अनुसार भागीदारी से बंचित है। इसका कारण क्या है जब इस देश के अन्दर हर दूसरा आदमी ओबीसी है। ओबीसी महासभा सरकार से मांग करती है कि देश में जातिगत जनगणना की जाये और उस आकडो को सार्वजनिक करें साथ ही देश की 140 करोड आवादी का प्रत्येक 140 करोड आवादी वाले व्यक्ति का हिस्सा प्रथक प्रथक दिया जाये। सभी सामाजिक शैक्षणिक, आर्थिक, राजनैतिक भागीदारी सुनिश्चित की जाये। देश में जातिगत जनगणना का आज भी देश में बंचित सामाज के लोग अपने आन्दलनों में एक ही नारा लगा रहे है कि देश मांगे जातिगत जनगणना

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देश में जातिगत जनगणना कराये जाने से एससी, एसटी, ओबीसी एवं बंचित समाज को सरकारों के माध्यम एससी, एसटी, ओबीसी एवं बंचित समाज के लोगों को लाभ होगा।

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