कई घरों के बुझे चिराग,नव विवाहिताओं के उजड़े सुहाग, माताओ की गोद हुई सुनी
अमित सिंह कुशवाह/भिण्ड ब्यूरो
भिण्ड 23 फरवरी। भिण्ड-ग्वालियर 719 हाईवे आज भी मौत का सफर बना हुआ है। छह लेन न बनने के कारण बीते एक साल में करीब 233 लोगों की जान चली गई है वही 644 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।यह आंकड़ा केवल संख्याएँ नहीं, बल्कि उन परिवारों की दर्दनाक दास्तां है, जिनके घर के चिराग बुझ गए, सुहाग उजड़ गए, और माताओं की गोद सूनी हो गई।इतना ही नहीं कई लोग अपने शरीर के महत्वपूर्ण अंग खो देने के कारण जीवन को नर्क से भी अधिक पीड़ादाई महसूस कर रहे हैं। वह अपने आप को अपने परिवार के ऊपर आर्थिक संकट की तरह देख रहे हैं।
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दर्द के आँसू, पर नेताओं की चुप्पी:-
बता दें कि इन भीषण हादसों के बावजूद जिले के सभी नेता खामोश हैं। इतना ही नहीं किसी ने भी इस गंभीर समस्या को लेकर आवाज नहीं उठाई है।यह नेताओ के द्वारा चुनावी वादों में हाईवे चौड़ा करने की बात तो खूब होती है, लेकिन इनके द्वारा दुर्घटनाओं का सिलसिला रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। आलम यह है इस हाइवे के सफर के कारण कई घरों ने ताउम्र के लिए खुशियों को खो दिया है।
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मौत का ट्रैप बना हाईवे,प्रतिदिन मौत का सिलसिला जारी:-
इस हाईवे पर रोजाना तेज रफ्तार वाहनों,अव्यवस्थित ट्रैफिक के कारण हादसे होते रहते हैं।सड़क संकरी होने के कारण इस हाइवे पर सफर करने वालो के लिए आमने-सामने की टक्करें बेहद घातक साबित हो रही हैं।इस हाइवे पर जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, उनके लिए यह सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि मौत का ट्रैप बन कर रह गई है।
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रोते परिवार, खामोश प्रशासन,कौन सुने इनकी पुकार:-
बता दें कि इस साल कई घरों में मातम पसरा, कई माँओं ने अपने लाल खो दिए और कई नवविवाहिताएं सुहागन से विधवा बन गईं। इतना ही नहीं इस हाइवे के कारण जिन घरों में शहनाईयां बजनी थी उन घरों में मातम पसरा हुआ है।इतना ही नहीं अस्पतालों में दर्द से कराहते घायल,किसी अपाहिज हो चुके इंसान की बेबसी, किसी अनाथ हो चुके बच्चे के आँसू, यह सब प्रशासन की उदासीनता की गवाही दे रहे हैं।
कब जागेगा प्रशासन? कब तक छिनती रहेगी निर्दोष जनता की जिंदगी:-
अब सवाल यह है कि क्या और कितनी मौतों के बाद प्रशासन जागेगा? क्या यह हाईवे छह लेन बनेगा या फिर निर्दोष लोगों की जान यूँ ही जाती रहेगी? इस हाइवे को लेकर सरकार और प्रशासन से जनता को जवाब चाहिए, क्योंकि हर गुजरता दिन किसी न किसी परिवार के लिए अंधकार बनकर आ रहा है। जो की बेहद ही गंभीर विषय है।
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