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खाद घोटाले में बड़ा खुलासा: सहायक समिति प्रबंधक ने 53 लाख से ज्यादा का किया गबन, FIR दर्ज

खाद घोटाले में बड़ा खुलासा: सहायक समिति प्रबंधक ने 53 लाख से ज्यादा का किया गबन, FIR दर्ज

ग्वालियर 21मई। ग्वालियर जिले की बहु प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था मर्यादित किटोरा (बैंक शाखा पिछोर) में खाद राशि के करोड़ों के लेन-देन में बड़ा घोटाला सामने आया है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित ग्वालियर की जांच में तत्कालीन सहायक समिति प्रबंधक नाथूराम स्वामी पर ₹53 लाख 11 हजार 681 रुपये 63 पैसे के गबन का आरोप सिद्ध होने के बाद थाना गिजौर्रा में एफआईआर दर्ज की गई है।

फरियादी शाखा प्रबंधक भूपेन्द्र सिंह भदौरिया निवासी सुदर्शन विहार कॉलोनी, लश्कर ग्वालियर द्वारा पुलिस को प्रस्तुत शिकायत और जांच प्रतिवेदन के अनुसार नाथूराम स्वामी ने वर्ष 2025-26 में खाद विक्रय से प्राप्त राशि बैंक खाते में जमा न कर शासकीय धन का गबन किया। मामले में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ग्वालियर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हिमांशु खाड़े ने भी एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए थे।

जांच रिपोर्ट के अनुसार संस्था किटोरा में औचक निरीक्षण के दौरान खाद गोदाम पर ताला बंद मिला, जिसके बाद अधिकारियों ने पंचनामा बनाकर ताला तुड़वाया। भौतिक सत्यापन में जहां एनपीके खाद का स्टॉक शून्य मिला, वहीं पीओएस मशीन रिकॉर्ड में 704 बैग दर्ज पाए गए। इससे स्पष्ट हुआ कि खाद स्टॉक में भारी गड़बड़ी कर रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर पैदा किया गया।

जांच दल ने बताया कि एफओआर (सीधा प्रदाय) योजना और कैश क्रेडिट लिमिट के माध्यम से उठाए गए खाद की बिक्री राशि बैंक में जमा नहीं कराई गई। केवल एफओआर से उठाए गए खाद में ही ₹51 लाख 22 हजार से अधिक की राशि लंबित पाई गई, जबकि कैश क्रेडिट लिमिट के जरिए उठाए गए खाद में भी लाखों रुपये की बकाया राशि सामने आई।

पूरे मामले की जांच के बाद जाँच दल ने अपनी रिपोर्ट में नाथूराम स्वामी को ₹53.11 लाख के गबन का दोषी माना। रिपोर्ट में कहा गया कि आरोपी द्वारा जानबूझकर शासकीय धन का दुरुपयोग कर बैंक को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई। बैंक द्वारा कई नोटिस जारी किए जाने के बावजूद आरोपी ने राशि जमा नहीं की।

पुलिस ने जांच प्रतिवेदन और प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर आरोपी नाथूराम स्वामी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) और 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले को सहकारी संस्थाओं में वित्तीय अनियमितताओं के बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

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