सामाजिक सद्भाव बनाए रखने, जातिगत विभाजन रोकने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण का लाभ देने की उठाई आवाज
प्रियंका ओझा/रौन संवाददाता
रौन/भिंड, 02 सितंबर। सर्व समाज के लोगों ने बुधवार को रौन तहसीलदार के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम ज्ञापन सौंपकर UGC से संबंधित प्रस्तावित मसौदे, वर्तमान आरक्षण व्यवस्था तथा सामाजिक सद्भाव से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर पुनर्विचार एवं समीक्षा किए जाने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा UGC से संबंधित मसौदा तैयार कर लागू किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने आशंका जताई कि यदि ऐसे प्रावधान लागू होते हैं, तो शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों के बीच जातिगत भावना और सामाजिक दूरी बढ़ने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति से मसौदे की पुनः समीक्षा कर सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग:-
सर्व समाज ने वर्तमान आरक्षण व्यवस्था की भी समीक्षा किए जाने की मांग प्रमुखता से उठाई। ज्ञापन में कहा गया कि लंबे समय से चली आ रही आरक्षण व्यवस्था का लाभ समाज के प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। प्रतिनिधियों के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण समाज में सम्पन्न और गरीब वर्ग के बीच असमानता की स्थिति पैदा हो रही है।

ज्ञापनकर्ताओं ने मांग की कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करते समय आर्थिक रूप से कमजोर मजदूर, किसान, रेहड़ी-पटरी लगाने वाले, बीपीएल परिवारों तथा पुलिस एवं सेना के शहीद परिवारों सहित वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों को भी विशेष प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही ज्ञापन में IAS, IPS, डॉक्टर, उच्च पदस्थ अधिकारी, विधायक, सांसद और मंत्री जैसे सम्पन्न वर्गों को मिलने वाले आरक्षण लाभ की समीक्षा किए जाने की मांग भी रखी गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि आरक्षण एवं सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी नीति बनाई जानी चाहिए।

जातिगत विभाजन बढ़ाने वाले प्रावधानों की समीक्षा का आग्रह:-
ज्ञापन में ऐसे कानूनों और प्रावधानों की समीक्षा की मांग भी की गई, जिनके संबंध में सर्व समाज के लोगों का मानना है कि उनसे समाज में जातिगत विभाजन अथवा वैमनस्य बढ़ने की संभावना है। प्रतिनिधियों ने कहा कि देश की एकता, अखंडता और सामाजिक भाईचारे को मजबूत बनाए रखने के लिए ऐसे प्रावधानों की समय-समय पर समीक्षा किया जाना आवश्यक है।

सर्व समाज ने देश में बढ़ती बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य का मुद्दा भी ज्ञापन में उठाया। प्रतिनिधियों ने कहा कि पर्याप्त रोजगार और अवसर नहीं मिलने के कारण देश के प्रतिभाशाली युवा विदेशों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे देश की बहुमूल्य प्रतिभा का लाभ दूसरे देशों को मिल रहा है।
उन्होंने केंद्र सरकार से युवाओं के लिए देश में ही बेहतर रोजगार एवं विकास के अवसर उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि युवा अपनी प्रतिभा और हुनर का उपयोग देश के विकास में कर सकें।
राष्ट्रपति से केंद्र सरकार को अवगत कराने की अपील:-
ज्ञापन के माध्यम से सर्व समाज ने राष्ट्रपति महोदया से अनुरोध किया कि ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार को अवगत कराया जाए। साथ ही UGC मसौदे की पुनः समीक्षा, सामाजिक सद्भाव को प्रभावित करने वाले प्रावधानों पर पुनर्विचार तथा वर्तमान आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग का उद्देश्य किसी वर्ग के अधिकारों का विरोध करना नहीं, बल्कि समाज में सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारा, समान अवसर और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के हितों को मजबूत करना है।
ये लोग रहे मौजूद:-
ज्ञापन सौंपने के दौरान जितेंद्र सिंह चौहान एडवोकेट भिंड, सुनील सिंह राजावत जागीरदार, सोनू सिंह राजावत मेहदवा, सिंबू सिंह राजावत बहादुरपुरा एवं संजय सिंह आचार्य जी मेहदवा सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी एवं सर्व समाज के लोग मौजूद रहे। सभी ने अपनी मांगों को राष्ट्रपति तक पहुंचाने के लिए रौन तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

