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तराजू कांटे की तौल की बजाय नापतोल की तोल कर वसूली, नापतोल विभाग की छापामार कार्रवाई केवल कागजो तक सीमित

                      चंबल आचरण
            भिंड ब्यूरो/रमेश सिंह कुशवाह
                   मो.7974799714
 भिण्ड। नापतोल विभाग द्वारा तोल कांटो की जांच अपने दफ्तर में बैठकर ही पूरी हो जाती है। नापतोल विभाग के अधिकारियों द्वारा दफ्तर से निकलकर जमीनी हकीकत में एक ही बार छापामार कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिससे उपभोक्ताओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सालों से जांच ना होने के कारण तोल कांटो की कम तौल की वजह से उपभोक्ता नुकसान उठा रहे हैं। लोगों की माने तो जिले में संचालित पेट्रोल पंप मानकों में गड़बड़ी करके लोगों को चूना लगा रहे हैं। लेकिन कई बार शिकायतें होने के बावजूद भी नापतोल विभाग के अधिकारियों द्वारा कार्यवाही नहीं की जा रही है। वहीं गैस एजेंसियों द्वारा ना तो गोदामों से सिलेंडर को तोल कर दिया जा रहा है।और ना ही होकर द्वारा घर पर डिलीवरी करने के समय सिलेंडर को तौला जा रहा है।कारण यह है कि अधिकतर होकरों के पास तोल कांटे ही नहीं है।और कुछ हद तक काटे हैं तो वह टूटे हुए हैं।क्योंकि अधिकारियों द्वारा समय-समय पर तौल कांटों का निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। क्योंकि अधिकारियों द्वारा दफ्तर में ही बैठकर सील लगाकर कांटों को सही करार दे दिया जाता है। नापतौल विभाग में सालों से जमें अधिकारियों की कमीशनखोरी के चलते आमजनों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। विभाग के अधिकारी संस्थानों में नाप तौल के उपकरणों और मानकों की समुचित जांच करने की जगह उद्यमियों-कारोबारियों से वसूली करने में लगे हैं। इस वसूली का खामियाजा आमजन को चुकाना पड़ रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सहायक नियंत्रक ने पूरे जिले में अपने खास व्यापारियों को मुखबिर बना रखा है। जिसकी सूचना पर व्यापारियों और कारोबारियों के प्रतिष्ठान में छापामार कार्रवाई करते है। वहां से जितनी वसूली होती है।उसमें मुखबिर व्यापारियों को भी नजराना पेश किया जाता है। लोगों के द्वारा यह भी कहा जा रहा है कि खाद्य सचिव, खाद्य नियंत्रक से शिकायत करने के बाद भी उसके खिलाफ विभागीय जांच ही शुरू नहीं हुई है। यह सबसे आश्यर्चजनक है। जबकि सरकार भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त है।बावजूद इसके कार्रवाई से खाद्य विभाग का उक्त अधिकारी अछूता है।
 *राशन वितरण केंद्र पर तोला जाता है कम राशन*
गरीबी से जूझ रहे लोगों को सरकार द्वारा राशन मुहैया कराया जा रहा है।लेकिन कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की लापरवाही के कारण उन्हें कम ही राशन मिल पा रहा है।कारण स्पष्ट है कि नापतोल अधिकारी का इस ओर ध्यान ही केंद्रित नहीं है। जिसका खामियाजा  गरीब परिवारो को उठाना पड़ता हैं।उनके हिस्से में 5 किलो गेहूं की जगह मात्र 4 किलो गेहूं आते है।
 शासकीय स्कूल द्वारा बांटे जा रहे राशन में हो रही है बड़ी गड़बड़ी
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले प्रत्येक छात्र को करीब 5 किलो गेहूं और 1 किलो चावल दिया जा रहा है।लेकिन आश्चर्य करने वाली बात यह है कि इन बच्चों को राशन वितरण करने की जिम्मेदारी स्कूल के शिक्षकों को दी गई है ।लेकिन इन शिक्षकों द्वारा हाथों से ही तोल करके बच्चों को राशन वितरण किया जा रहा है।अंदाजा इसी बात से ही लगाया जा सकता है।की किस प्रकार यह राशन वितरण किया जा रहा होगा।

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