प्राइवेट लड़के लगाकर वसूली जारी, पूछने पर रजिस्टार को नहीं सूझा जवाब
अमित सिंह कुशवाह/भिण्ड
भिण्ड 17 जनवरी। जिले में अलग ही कारनामे देखने को मिल रहे हैं आलम यह है कि कुछ विभागो में प्राइवेट लड़के लगाकर जमकर वसूली करवाई जा रही है। आलम यह है कि सरकारी कर्मचारियों को कोई भी कार्यवाही का भय नहीं है। बता दें कि चंबल आचरण की टीम जब लहार अनुभाग के रजिस्टार कार्यालय में पहुंची तो वहां का नजारा कुछ और ही देखने को मिला।
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आलम यह था कि रजिस्टार अन्वेष गुप्ता रजिस्ट्री करवाने आए लोगों से बातचीत कर रहे थे वहीं स्टांप वेंडर कंप्यूटर से लोगों की रजिस्ट्री कर रहा था वही बाहर खड़े प्राइवेट लड़के जल्दी नंबर लगाने के लिए आने वाले लोगों से वसूली कर रहे थे। इतना ही नहीं जब इस बारे में रजिस्टार अन्वेष गुप्ता से पूछा गया तो उन्हें कोई भी जवाब नहीं सूझा और मामले को टालने लगे।बता दें कि अन्वेष गुप्ता बाबू के पद पर पदस्थ हैं जिनको अतिरिक्त प्रभार के तौर पर रजिस्टार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जो कि अपने अधिकारों का जमकर फायदा उठा रहे हैं।

प्रत्येक रजिस्ट्री के अलग-अलग किये दाम फिक्स, बने हुए मकान को खाली प्लॉट दिखाकर की जा रही रजिस्ट्री
लोगों की माने तो रजिस्टार ने भ्रष्टाचार की सभी चरम सीमाओं को ही पार कर दिया है। प्रत्येक रजिस्ट्री के अलग-अलग दाम फिक्स कर दिए हैं। रजिस्टार के द्वारा प्राइवेट लड़के लगाकर न सिर्फ रजिस्ट्री एवं वसूली करवाई जा रही है बल्कि बने हुए मकान को खाली प्लॉट दिखाकर भी रजिस्ट्री की जा रही है और तो और जल्दी नंबर लगाने के लिए भी पैसे लिए जा रहे हैं। मौजूद लोगों की माने तो प्रतीक रजिस्ट्री पर 1500 से 2000 रुपये वही बने हुए मकान को खाली प्लॉट दिखाने के 15000 से 20000 तक लिए जा रहे हैं। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बाबू प्रभार मिलने के बाद प्रतिदिन कितनी कमाई कर रहा है। जिसको वरिष्ठ अधिकारियों का कोई भी डर भय नहीं है।
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