गुरुत्वाकर्षण के बिना प्रथ्वी का अस्तित्व नही है।ऐसे ही गुरु के बिना भी व्यक्ति कुछ नही है। – पवनसिंह परिहार
वीरेंद्र कुमार/मुरैना ब्यूरो
मुरैना 19 जुलाई। दिनांक 16/7/2025 को गुरु वंदन कार्यक्रम शासकीय मॉडल स्कूल मुरैना में संपन्न हुआ कार्यक्रम का शुभारंभमां सरस्वती जी एवं गुरु महर्षि वाल्मीकि की पूजा अर्चना कर कार्यक्रम प्रारंभ किया गया । इसी क्रम में कार्यक्रम को गति देने के लिए अतिथियों का परिचय जिला अध्यक्ष पवन सिंह परिहार के द्वारा करवाया गया । जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में .श्री धनराजू सिंह विभाग प्रचारक मुरैना विशिष्ट अतिथि श्री सुधीश कुमार सक्सेना जिला शिक्षा अधिकारी मुरैना , श्याम सिंह तोमर मॉडल स्कूल प्राचार्य एवं ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मुरैना ,इसी क्रम में प्रांतीय उपाध्यक्ष रामबरन सिंह सिकरवार ,संभागीय सचिव राघवेंद्र सिंह धाकरे,जिला सचिव रामावतार सिंह सिकरवार,राम गुप्ता,मंचासीन रहे ।

इसी क्रम मेंविशिष्ट अतिथि श्री सुधीश कुमार सक्सेना जिला शिक्षा अधिकारी मुरैना नेअपने उद्बोधन में कहा कि संगठन किसी उद्देश्य को लेकर संचालित होते हैं परंतु मध्य प्रदेश शिक्षक संघ राष्ट्र हित, छात्र हित, समाजहित , शिक्षक हित , को लेकर गतिमान है हम यही आशा करते हैं । शिक्षक संगठन इस दिशा में कार्य करते रहे तो राष्ट्र के प्रति नागरिक जागरुक होते हैं इसी प्रकार के कार्यक्रम सतत आयोजित होते रहना चाहिए ।इससे समाज मैं जो विसंगति आई है वह दूर होगी ।हम चाहते हैं कि ऐसे कार्यक्रम सभी विकास खण्डो एवं शंकुलो पर आयोजित हो। इसीक्रम में संगठन का परिचय पर प्रकाश प्रांतीय उपाध्यक्ष रामबरन सिंह सिकरार के द्वारा डाला गया ।उन्होंने अपनी उद्बोधन में कहा किमध्य प्रदेश शिक्षक संघ की7 अक्टूबर1970 मेंमध्य प्रदेश शिक्षक संघ की स्थापना हुईऔर समय जो मनीषियों के द्वारा चिंतन किया गया । उन चार पुरुषार्थों को लेकरसंगठन की स्थापना की गई ।जिसमें राष्ट्र हित, छात्र हित, सामाज हित , एवं शिक्षक हित, है।इनको लेकर संगठन गतिमान हैइसी क्रम मेंअखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की स्थापना1988 मेंहुई ।इसकी प्रेरणा सेगुरु वंदन कार्यक्रम पूरे देश में आयोजित किया जा रहे हैं ।इससे समाज में आई विसंगति निश्चित ही दूर होगी । एवं युवा पीढ़ी माता-पिता, एवं गुरु के प्रति संवेदनशील होंगे ।

इसी क्रम में आज के मुख्य वक्ताश्री धनराजू सिंह विभाग प्रचारक नेअपने उद्बोधन में कहा किआज का अपना कार्यक्रम गुरु वंदन कार्यक्रम है गुरु वह हैजो अंधकार से प्रकाश की ओरले जाता है यानी वह शिक्षा देता है और शिक्षा क्या है शिक्षा के बारे में रहते हैं कि असतो माँ सद्गमय ,तमसो मा ज्योतिर्गमय यानी तमश अंधकार से ज्योति की ओर लेकर जाना , जीवन को ज्योतिर्मय बनाना तो यह शिक्षा ही है जो हमको ऐसा एक ज्ञान देता है
दो प्रकार की बातें हैं एक तो जानकारी होती है और दूसरा ज्ञान होता है यह जानकारी कहां से मिलती है जो जानकारी मिलने के लिए गूगल पर्याप्त है आजकल गूगल पर सब मिलता है लेकिन ज्ञान कहां से मिलता है जिन बातों को हम किताब से सीखते हैं देखकर सीखते हैंजिन क्षणों को हम जीते हैं जो अनुभव हमको आते हैं उन अनुभवों से जो प्राप्त होता है उनके करने से जो प्राप्त होता है उसे वास्तविक ज्ञान कहते हैं । और इसलिए अपने यहां पर इस किताबी ज्ञान के अलावा व्यवहारिक ज्ञान पर प्रकाश डाला गया । और इसलिए भारत का गौरव ऐसा था यहां पर तक्षशिला नालंदा जैसे बड़े-बड़े विश्वविद्यालय चेजिनमें छात्र संख्या 10 ,000 ‘ शिक्षक संख्या 2000 थी ।
नालंदा की अगर बात की जाए तो बिहार के अंदर आज उसके पुनरउद्वार को लेकर सरकार ने थोड़ा प्रयास किया । यह भारत के गौरवशाली परंपरा के शिक्षा के केंद्र थे । जहां पर अनेक प्रकार के विषय पढ़ाए जाते थे देश दुनिया के चयनित छात्र वहां पर आकर शिक्षा ग्रहण करते थे जिसकी लाइब्रेरी इतनी बड़ी थी कि कितना ज्ञान का भंडार उसे लाइब्रेरी के अंदर होगा जब बख्तियार खिलजी ने उस लाइब्रेरी को जलाया तो 3 महीने तक धधक धधक कर जलती रही इतनी अधिक पुस्तकों का भंडार उस नालंदा विश्वविद्यालय में की लाइब्रेरी के अंदर था दुनिया में हम ही ऐसे थे जिन्होंने दुनिया को ज्ञान और विज्ञान की शिक्षा दी दुनिया में जब लोग कपड़े पहनना नहीं जानते थे भोजन करना नहीं जानते थे खानाबदोश जीवन बिताया करते थे तब हमारे यहां पर दुनिया की सबसे पुरानी पुस्तक जिन्हें ” वेद ” कहा जाता है । उन वेदों की ऋचाएं पढ़ी जाती थी । यह परंपराएं पीडी दर पीढ़ी चली आ रही हैं । और यह गुरु परंपरा के कारण ही है सारी चीज बनी हुई है गुरु के अंदर भी गुरुत्व होता है विज्ञान के अंदर हम पढ़ते हैं तो उसे एक वल का नाम है पृथ्वी के अंदर भी गुरुत्व है यदि गुरुत्व किसी का समाप्त कर दिया जाए तो व्यक्ति कुछ नहीं है ।बिना गुरुत्व के पृथ्वी भी धूल के कणों में विलीन हो जाएगी ।अपने देश का भी गुरुत्व हैअपने देश का गुरुत्व क्या हैअपने देश का गुरुत्व इसकी परंपराएं संस्कृति रीति रिवाजयहां की यहां का समाज इस देश का गुरुत्व है । यूनान मिस्र रोम सब मिट गए जहां से कुछ बातहै कि हस्ती मिटती नहीं हमारे भारत में कुछ बात तो ऐसी है जो इतने आक्रमणों के बाद भी इसकी हस्ती मिटा नहीं पा रहा पा रहे ।”आज भारत फिर से विश्व गिरी की ओर बढ़ रहा है इसका आधार गुरु शिष्य परंपरा ही है । “
इसी क्रम में संभागीय सचिव राघवेंद्र सिंह ठाकरे ने अपने को उद्धवोधन में कहा किगुरुओं के संस्कारों को अर्जित करके लोगों में या श्रेष्ठ जीवन जीए ।जिनका आज हम भगवान के रूप में मानते हैं चाहे वह राम हो कृष्णा हो उनके भी गुरु थे महापुरुषों के भी गुरु थे ।गुरु हर किसी का होता है ।लेकिन महान हर कोई नहीं होता क्योंकि गुरु को प्रति समर्पण भाव से श्रद्धा और विश्वास के साथ जो गुरु का आदर करते हैं उनको दी हुई शिक्षाओं पर चलता है ।वही व्यक्ति जीवन में सफल रहता है ।
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अध्यक्षीय उद्बोधन में श्यामवीर सिंह राठौड़ ने कहा किगुरु का महत्व जो हमारे वेद ने बताया वह हमारे जीवन चरित्राश है किंतु समय के गुरु एवं शिष्य परंपरा में एकअवरोध सा उत्पन्न हुआ है जो की मैकाले की शिक्षा पद्धति को अपनाने के कारण दृष्टिगोचर हो रहा है मध्य प्रदेश शिक्षक संघ जैसे राष्ट्रवादी संगठन एक बार पुनः गुरु वंदन का आयोजन कर समाज और बच्चों में माता-पिता और गुरु के प्रति श्रद्धा की भावना दीक्षित कर रहा है इसी को लेकर यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश नहीं बल्कि पूरे देश में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंग की प्रेरणा से मध्य प्रदेश शिक्षक संघ प्रत्येक विद्यालय तक करने का प्रयास कर रहा है । और 6 मौलिक अधिकार एवं 11कर्तव्य अधिकारों कोअपने जीवन में उतारने का प्रयास करेंतथा प्रत्येक विद्यालय के सूचना पटल पर अंकित करें ।
आज के कार्यक्रम में मंच का सफल संचालन कोषाध्यक्ष श्रीमती बिंदु सोलंकी के द्वारा किया गया एवं आभार जिला सचिव रामावतार सिंह सिकरवार ने मंचासीन अतिथियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की एवं सभी शिक्षक साथियों एवं छात्रों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया ।आज के कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित जिला उपाध्यक्ष पीके त्यागी ,धर्मेंद्र भारद्वाज, रजनी भदोरिया जिला उपाध्यक्ष, मधु तोमर जिला सहसचिव , नीलू मिश्रा,सुरेन्द धाकड़ ,तहसील अध्यक्ष चरणदास पिप्पल,विकासखंड अध्यक्ष गौरव सिंह तोमरनगर अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह सिकरवार , रंजीत वर्मा, महेश शर्मा ,राकेश मावई,रणवीर कंसाना ,कप्तान कुशवाह, कुलदीप सोलकी,कपिल भारद्वाज,बृजराज सिंह सिकरवार,संजय दीक्षित,मनोज शर्मा ‘अरविंद सिकरवार ,महेश कुमार व्यास, राजेन्द्र सोलंकी,विनोद कुमार गुप्ता,सीताराम सिकरवार,वीरेंद्र सिंह, पंजाब सिंह यादव ,अखिलेश शर्मा,रामभोग शर्मा,शैलेन्द्र सिकरवार,संध्या चौहान ,अंजना सिकरवार,ममता शर्मा ,गीता ,प्रीति शर्मा,गीता तोमर ,राजकुमारी ,राजरानी चौहान, आदि शिक्षक शिक्षिकाएं एवं छात्रों उपस्थित रहे

