ग्वालियर में विश्व रैबीज दिवस पर हुए जागरूकता कार्यक्रम
ग्वालियर – कलेक्टर ग्वालियर श्रीमती रुचिका सिंह चौहान के निर्देशन में स्वास्थ्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों का बेहतर संचालन किया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एम.एस.सागर ने बताया कि रेबीज दिवस के अवसर पर दिनांक 28 सितंबर 2026 को जिला अस्पताल मुरार, सिविल अस्पताल डबरा में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम *”एक साथ मजबूत (Stronger Together) – वन हेल्थ (One Health)”* है, जिसका उद्देश्य मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के समन्वित प्रयासों से रेबीज उन्मूलन है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ एम एस सागर ने बताया कि रेबीज एक जानलेवा घातक लेकिन 100% वैक्सीन से रोकी जा सकने वाली बीमारी है। एक छोटी सी खरोंच को भी नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।रेबीज़ के शुरुआती लक्षण में बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, काटने के स्थान पर दर्द,झुनझुनी,मितली अथवा भूख कम लगना है। वहीं गंभीर लक्षणों में बैचेनी, गंभीर भ्रम, निगलने में कठिनाई,हाइडरोफोबिया (पानी से डर लगना) अत्यधिक लार आना, मांसपेशियों की कमजोरी सांस लेने में कठिनाई, बेहोशी आदि है।

कुत्ते,बिल्ली या अन्य किसी जंगली जानवर के काटने पर घाव पर मिर्च, हल्दी,तेल, मिट्टी या कोई भी अन्य घरेलू सामग्री न लगायें, घाव को बिना डॉक्टर को दिखाएं पट्टी या कपड़े से न ढंके रेबीज़ के लक्षण सामने आने का इंतजार बिल्कुल न करें तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। टीकों का कोर्स बीच में अधूरा न छोड़ें।
रेबीज से बचाव के लिए प्रमुख उपायों में:-
1. पालतू कुत्तों और बिल्लियों को एंटी-रेबीज वैक्सीन जरूर लगवाएं।
2. कुत्ते के काटने/खरोंच पर घाव को 10 से 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोएं।
3. तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र / जिला चिकित्सालय में संपर्क करें।
4. डॉक्टर की सलाह अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स तथा संपूर्ण टीकाकरण अवश्य कराएं।
रेबीज़ उन्मूलन तभी संभव है जब हम सब मिलकर काम करें।
जिला एपिडेमोलाजिसट डॉ. महेन्द्र पिपरोलिया ने बताया कि जिला अस्पताल मुरार व अन्य शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में एंटी-रेबीज वैक्सीन निःशुल्क उपलब्ध है।

विश्व रैबीज दिवस पर:-
जागरूकता कार्यक्रम जिला चिकित्सालय मुरार, सिविल अस्पताल डबरा व शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय थाटीपुर सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं मे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित कर रैबीज के बारे में जानकारी दी गई।

