मामला सहकारिता विभाग ग्वालियर का
ग्वालियर 25 अक्टूबर। मध्य प्रदेश की मोहन सरकार भले ही अपनी उपलब्धियां को लेकर पीठ थपथपा रही हो, लेकिन उन्ही के कई विभागों में निकले स्तर पर बैठे कुछ अधिकारीयों/कर्मचारियों की मिली भगत से फर्जी बिलों का भुगतान जमकर किया जा रहा है। हालांकि फर्जी बिलों के भुगतान के मामले तो कुछ पुराने हो चुके हैं लेकिन अब तो विभागों के द्वारा फर्जी संस्थाओं का पंजीयन भी किया जा रहा है। जिससे करोड़ों की हेरा फेरी से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
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आपको बता दें कि ऐसा ही एक मामला ग्वालियर के सहकारिता विभाग से संज्ञान में आया है जहां पर कुछ आसामाजिक तत्वों के द्वारा एक फर्जी साख सहकारी संस्था का पंजीयन कर लिया। इसमें अचंभित कर देने की बात यह है कि फर्जी संस्था का पंजीयन होने के बाद भी संयुक्त संचालक सहकारिता ग्वालियर को इस बात की कानों तक भनक नहीं पड़ी।
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जानकारी के अनुसार बता दें कि आवेदक पुरुषोत्तम पुत्र बंशीलाल मौर्य निवासी चंद्रवादिनी नाका के द्वारा ग्वालियर कलेक्टर एवं संयुक्त संचालक सहकारिता ग्वालियर को दिए गए आवेदन में बताया गया है कि प्रार्थी को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता सहकारी समिति मर्यादित ग्वालियर के द्वारा फर्जी तरीके से समिति का सदस्य बनाया गया जिसकी प्रार्थी को किसी भी प्रकार की कोई जानकारी नहीं है। वहीं आवेदक पुरुषोत्तम मौर्य ने यह भी आशंका जाहिर की है कि समिति का गठन करने वाले लोगों के द्वारा किसी बड़े घोटाले को अंजाम दिया जा सकता है।
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अब यहां पर सोचने वाली बात यह है कि किसी समिति का गठन फर्जी सदस्य बनाकर कर लिया जाता है लेकिन सहकारिता विभाग में बैठे अधिकारियों के द्वारा उन सदस्यों का सत्यापन भी नहीं किया गया और सहकारी संस्था का पंजीयन कर दिया गया। जिससे कहीं न कहीं सहकारिता विभाग के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। इस प्रकार से तो कोई भी व्यक्ति फर्जी संस्था का पंजीयन कराकर करोड़ का घोटाला करके रफू चक्कर हो सकता है। ऐसे मामलों को सहकारिता विभाग के उच्च अधिकारियों को अपने संज्ञान में लेते हुए कठोर कदम उठाने चाहिए जिससे फर्जी संस्थाओं को चिन्हित करते हुए उन पर उचित कार्रवाई की जा सके।

