मुफलिसी की मार झेल रही असहाय विकलांग महिला,आवास के लिए दर दर भटकने को मजबूर
अमित सिंह कुशवाह/भिण्ड ब्यूरो
भिण्ड 19 अगस्त। जिंदगी जब इम्तिहान लेती है तो किस कदर लेती है इसका जीता जागता उदाहरण यह है एक तरफ मुफलिसी की मार वहीं दूसरी ओर पति का छूटा साथ, ऊपर से विकलांगता का दंश, गरीबी, लाचारी और बेबसी का दर्द झेल रही ग्राम बिछौली, तहसील अटेर की 40 वर्षीय संगीता शाक्य ने मंगलवार को कलेक्टर की जनसुनवाई में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत किए जाने की गुहार लगाई। संगीता के पति केशव शाक्य का निधन करीब दस वर्ष पूर्व हो चुका है। उनके दो छोटे बच्चे हैं जो आज भी सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार का सहारा छिन जाने के बाद संगीता का जीवन पूरी तरह संघर्षमय हो गया।
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बता दे की दोनों पैरों से विकलांग संगीता हाथों के सहारे चलकर किसी तरह अपना जीवन गुजार रही है। बरसात के दिनों में उनका कच्चा घर टपकता है और कभी भी बड़ी दुर्घटना घट सकती है। मुफलिसी इस कदर हावी है कि संगीता आज भी दूसरों की सहानुभूति और मदद के सहारे जिंदगी बिता रही है। इतना ही नहीं संगीता ने गांव के सरपंच और सचिव से कई बार आवास योजना में नाम जोड़ने की गुहार लगाई बावजूद इसके उन्हें अब तक मकान स्वीकृत नहीं हो सका। शारीरिक अक्षमता के कारण वह लगातार दफ्तरों के चक्कर भी नहीं काट पातीं। यह मामला इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि किस तरह गरीबी और असहायता किसी इंसान को बेबस बना देती है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन कब तक इस लाचार महिला की सुध लेता है और उसे छत मुहैया कराता है। क्योंकि जनसुनवाई में उन्हें जल्द ही आवास मुहैया कराने का आश्वासन दिया गया है।


