खाद्य सुरक्षा विभाग की दबिश से उजागर हुई खाद्य सामग्री की गुणवत्ता,सुस्त कार्यवाहियों से विभाग पर उठ रहे सवाल
अमित सिंह कुशवाह/भिण्ड ब्यूरो
भिण्ड 06 अगस्त। रक्षाबंधन जैसा पवित्र पर्व, जहां बहनें भाइयों की लंबी उम्र की दुआ मांगती हैं, वहीं दूसरी ओर हमारे बाज़ारों में परोसे जा रहे मिलावटी खाद्य पदार्थ किसी ज़हर से कम नहीं। जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने कुछ दिनों पहले कई डेयरियों, मावा निर्माण इकाइयों और बेकरी प्रतिष्ठानों पर छापामार कार्रवाई की लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर यही सतर्कता सालभर रहे, तो क्या त्योहारों से पहले ऐसी आपात कार्रवाई की नौबत आती? बता दें कि कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी रेखा सोनी और रीना बंसल ने कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी राम तोमर के साथ मिलकर ग्राम बिरखड़ी, शेरपुर, मोतीसिंह का पुरा और सौंधा के प्रतिष्ठानों से मावा, पनीर, घी, बिस्किट और टोस्ट के नमूने जांच के लिए लिए।

आलम यह है कि त्योहारों पर जब हर घर में मिठाइयाँ बनती हैं, तब मिलावटी मावा और नकली घी आमजन की सेहत से जानलेवा खिलवाड़ कर सकते हैं। अफ़सोस की बात यह है कि ऐसे प्रतिष्ठानों की जांच केवल त्योहारी मौसम में ही होती है। क्या बाक़ी समय लोगों की सेहत की कोई कीमत नहीं? स्थानीय लोगों की पीड़ा है यदि खाद्य विभाग सालभर अपनी ज़िम्मेदारी निभाए, तो मिलावटखोरों की हिम्मत ही न हो आमजन को बीमार करने की।लेकिन अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, लेकिन यह भी सच्चाई है कि अगर दोषियों को सज़ा न मिली, तो यह सिर्फ़ एक खानापूर्ति बनकर रह जाएगी।


