सरकार की हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, गांव-गांव स्मार्ट क्लास, नियमित शिक्षण स्टाफ की बाते बेबुनियादी हुई साबित
अमित सिंह कुशवाह/भिण्ड ब्यूरो
भिण्ड 07 सितंबर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की जमीनी हकीकत किसी से छिपी नहीं है। हालात इतने खराब हैं कि शासकीय प्राथमिक विद्यालय नंदरोली में महीनों से ताला लटका हुआ है। यहां पदस्थ हेड मास्टर राजेश गोयल एवं एक अन्य शिक्षक की ड्यूटी तो लगी हुई है, लेकिन महीनों से दोनों स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं।
अधिकारियों की उदासीनता के कारण गरीब बच्चों की पढ़ाई पर संकट
गांव के बच्चों की शिक्षा पूरी तरह ठप है। अभिभावक मजबूरी में बच्चों को घर पर ही बैठाए हुए हैं। सवाल यह है कि जब शिक्षक विद्यालय में उपस्थित ही नहीं हैं तो उनकी हाजिरी किस प्रकार दर्ज हो रही है और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर क्यों बैठे हैं।

सिर्फ नंदरोली नहीं, जिलेभर के स्कूलों का यही हाल
गांववासियों का कहना है कि यह समस्या केवल नंदरोली की नहीं है, बल्कि जिले के अधिकांश ग्रामीण स्कूलों में यही हाल है। कई जगह विद्यालयों में नियमित पढ़ाई के बजाय ताले लटक रहे हैं। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण गरीब ग्रामीण बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
गांव निवासी बोले – अधिकारी कर रहे लापरवाही
नंदरोली गांव निवासी राजू का कहना है सरकारी स्कूल तो सिर्फ नाम के लिए खुले हैं। बच्चे पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं और शिक्षक वेतन उठाकर आराम से घर बैठे रहते हैं। अगर यही हाल रहा तो हमारे बच्चों का भविष्य कौन संवारने वाला है?वहीं सूरज ने गुस्से में कहा हमने कई बार अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाई, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। शिक्षा विभाग के अधिकारी जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो हम गांववाले मिलकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि स्कूल खुले हैं या बंद। यही कारण है कि सरकारी स्कूलों की स्थिति लगातार दयनीय होती जा रही है और शिक्षा का स्तर रसातल में जा पहुंचा है।

