वीरेंद्र कुमार/मुरैना ब्यूरो
कैलारस 22 अप्रैल। नगर परिषद कैलारस के द्वारा 1994 आवंटित की गई दुकान जिनका प्रीमियम तत्समय ₹35 000 ₹40000₹ तथा ₹70000 लिए गए। जिसका किराया भी प्रतिमा दुकानदारों से नगर परिषद लेती रही है। 2012 में स्थानीय प्रशासन के द्वारा उन दुकानों को तोड़ दिया गया था। जिसका मुकदमा हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट में चला और उसके बाद दुकानदारों के पक्ष में निर्णय हुआ। नगर परिषद को जमीन जो आवंटित की गई, उसके पक्ष में फैसला आ चुका है अब दुकानदारों को निशुल्क दुकान बनाकर प्राथमिकता के आधार पर प्राइम लोकेशन पर दी जानी चाहिए। जिसमें नगर परिषद की जो लेट लतीफी हो रही है उससे दुकानदारों में आक्रोश व्याप्त है। 2012 से 209 दुकानदार बेरोजगार होकर दर-दर की ठोकर खा रहे हैं। आज एक बार फिर दुकानदार इकट्ठे होकर माकपा नेता पूर्व नपाध्यक्ष अशोक तिवारी के नेतृत्व में मुख्य नगर परिषद अधिकारी को मांग पत्र सौंपने पहुंचे हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन विकास विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल के नाम एक ज्ञापन सोपा है।

ज्ञापन के बाद माकपा नेता ने बताया की सभी कानूनी कारवाइयां पूरी हो चुकी है् अब बगैर विलंब किए दुकान बनाकर प्राथमिकता के आधार पर आवंटित की जाएं। उन्होंने 2016 में बने कानून पर भी चर्चा करते हुए कहा कि यह दुकान 2012 में तोड़ी गई थी इसलिए इस पर यह नियम लागू नहीं होगा नियम भविष्य के लिए बनाए जाते हैं। पूर्व की घटनाओं पर वह लागू नहीं होगा। ज्ञापन सौंपते हुए व्यापार मंडल कैलारस के पूर्व अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने भी बताया के तीन इंजन वाली सरकार पूरी तरह असफल हो चुकी है। जनता के छोटे-छोटे काम नहीं हो पा रहे हैं। 2012 से विस्थापित दुकानदार डर-डर की ठोकर खा रहे हैं। बेरोजगारी के आलम में परिवार भूखे मरने के कगार पर है। परंतु तीन इंजन की सरकार झूठे वादों के अलावा इनको दो वक्त की रोटी नहीं दे पा रही है। ऐसे में भारतीय संविधान में दिया गया लोकतांत्रिक अधिकार आंदोलन का ही एकमात्र रास्ता विस्थापित दुकानदारों के पास है। अगर अभिलंब दुकान नहीं दी गई तो दुकानदार भाई मजबूर होकर अनिश्चितकालीन आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। आंदोलन का नेतृत्व संतोषी लाल मंगल सुनील गुप्ता मनीष गोड, इब्राहिम शाह पूर्व पार्षद, बीरबल धाकड़ दर्शन श्रीवास, मुरारी लाल गोड, विपिन पांडे आदि ने किया। सभी ने प्रमुख सचिव से मांग की है कि कोई भी फैसला लेने से पहले दुकानदारों को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई का मौका दिया जाना चाहिए। दुकानदार भाइयों ने भी तत्काल प्रभाव से दुकान निर्माण करके प्राथमिकता के आधार पर प्राइम लोकेशन पर दुकान देने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।

