Sat. Apr 18th, 2026

        भिंड ब्यूरो-अमित सिंह कुशवाह की रिपोर्ट

भिंड RTO ऑफिस में पहले चढ़ावा चढ़ाऔ फिर काम कराओ 

आरटीओ चेम्बर पर ताला दोपहर 12:00 बजे के बाद बाबू पहुंचते हैं दफ्तर

भिंड।भिंड जिले का आरटीओ कार्यालय बना दलालों का अड्डा यहां पर पदस्थ क्लर्क से लेकर आरटीओ अफसर के इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं दलाल आरटीओ ऑफिस में क्लर्क बेवजह मनाते हैं छुट्टी भिंड जिले की आरटीओ प्रभारी स्वाति पाठक भी बाहर रहती हैं। ऐसे में परिवहन संबंधी आवेदकों को मजबूरन दलालों की शरण में जाना पड़ता है।

भिंड जिले की आरटीओ कार्यालय आवेदकों से ज्यादा दलाल घूमते नजर आते हैं परिवहन संबंधी कोई भी काम करवाना हो जैसे लाइसेंस बनवाना हो नई पुरानी बहन का पंजीयन कराना हो बहन का स्थानांतरण कराना हो या फिटनेस संबंधी कोई काम कराना हो तो दलालों को उचित मूल्य देना पड़ता है। अगर आरटीओ मैडम अपने कार्यालय में 2 दिन भी बैठे तो आवेदकों को उचित मूल्य नहीं चुकाना पड़ेगा भिंड आरटीओ कार्यालय में पदस्थ बाबू ने अपने चहेते दलालों को सक्रिय कर रखा है। जिससे आने वाले कार्यों को दलाल करते हुए नजर आते हैं। मजे की बात तो यह है कि यहां पदस्थ बाबू कभी भी समय पर दफ्तर उपस्थित नहीं होते हैं। और लहार में कैंप लगाने के नाम पर गुरुवार को भिंड आरटीओ कार्यालय की छुट्टी कर देते हैं। और भिंड आरटीओ प्रभारी स्वाति पाठक भिंड कार्यालय आने का नाम ही नहीं लेती क्योंकि सक्रिय दलाल चला रहे हैं भिंड आरटीओ कार्यालय

 आरटीओ कार्यालय की हकीकत जानने के लिए जब चम्बल आचरण की टीम ने मौके पर जाकर देखा तो आरटीओ कार्यालय का बाहर गेट का ताला खुला था बाकी सभी चेम्बरो का ताला बंद था जब हमारी टीम है वहां पर पूछताछ की तो पता चला आरटीओ ऑफिस का ताला चपरासी ने खोला है। जब चपरासी से बात की तो उसने अपना नाम अशोक बताया और हमारी टीम ने उससे पूछा कि यह आरटीओ कार्यालय कितने बजे खुलता है उसने बताया 10 बजे खुलता है। चपरासी से पूछा कि अंदर ऑफिस में कौन-कौन है।तो उसने कहां की अभी तक कोई बाबू ना कोई अफसर आया है जब हमारी टीम ने उससे समय पूछा तो उसने बताया की 12:00 बज चुके हैं। चहेते सक्रिय दलालों ने देखा कि चम्बल आचरण की टीम कवरेज कर रही है तो उन्होंने आरटीओ प्रभारी को फोन करके बता दिया। जो लहार कैंप के नाम पर गुरुवार को छुट्टी करते थे सभी बाबू 20 मिनट के अंदर आरटीओ ऑफिस पहुंच गए जब इन बाबू से पूछताछ की गई तो एक बाबू ने अपना नाम इतेंदर बहादुर बताया एक नया बहाना बताया जबकि हमारी टीम ने पूछ ही नहीं पाया उससे पहले बाबू बोले हम तो कोर्ट में गए थे हमारी पेशी थी

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जबकि कुछ समय पहले पूर आरटीओ ऑफिस लहार कैंप के लिए गई थी सभी बाबू और प्रभारी मिलकर पुराने कैंप में खींचे गए फोटो दिखाकर गुरुवार की छुट्टी कर लेते है। अगर फोटो ज्यादा पुराना हो जाता है तो वहां थोड़ी देर के लिए कैंप लगाकर फोटो खींचकर वापस अपने अपने घर चले जाते हैं।इससे आप समझ सकते हैं भिंड आरटीओ कार्यालय कितना लापरवाह है।

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